गुरु चांडाल दोष के निवारण हेतु शास्त्रसम्मत एवं पारंपरिक विधि से विशेष पूजा का आयोजन। अनुभवी पंडित द्वारा जीवन की बाधाओं से मुक्ति का मार्ग।
गुरु चांडाल दोष तब बनता है जब जन्म कुंडली में
गुरु ग्रह (बृहस्पति) के साथ
राहु या केतु की युति हो जाती है।
यह दोष व्यक्ति की शिक्षा, विवाह, संतान सुख,
करियर, धन एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।
गुरु ग्रह ज्ञान, धर्म और सद्बुद्धि का कारक माना जाता है,
जबकि राहु एवं केतु भ्रम और बाधाओं का कारण बनते हैं।
इनके साथ होने से व्यक्ति गलत निर्णय,
मानसिक तनाव और जीवन में अस्थिरता का सामना करता है।
उज्जैन में बाबा महाकाल के चरणों में
एवं पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर
विधि-विधान से गुरु चांडाल दोष शांति पूजा कराई जाती है।
इस पूजा से गुरु ग्रह को बल प्राप्त होता है,
नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं
और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।